रामेश्वर नाथ तिवारी:अपने बारे मेंमेरा जन्म 1.10.1960...को उत्तर प्रदेश के जनपद देवरिया अंतर्गत ग्राम टैरिया, पत्रालय–सोहनाग, तहसील–सलेमपुर में हुआ। मेरे पिताजी स्व. श्री अवधेश कुमार तिवारी शिक्षा जगत से जुड़े रहे। वे प्राइमरी स्कूल तिलौली, सोहनाग में सहायक अध्यापक के रूप में नियुक्त हुए, तत्पश्चात प्रधान अध्यापक बने और अंततः जूनियर हाई स्कूल सोहनाग से सहायक अध्यापक के पद से सेवानिवृत्त हुए।सेवानिवृत्ति के पश्चात पिताजी ने अपना सम्पूर्ण जीवन ईश्वर-भक्ति और काव्य-सृजन को समर्पित कर दिया। उनका आध्यात्मिक उत्कर्ष इतना गहन था कि वे संसार को माया मात्र मानने लगे। आज भी जब जीवन में दुःख या चिंता घेरती है, उनकी कविताएँ मुझे अद्भुत शांति और दिव्य दृष्टि प्रदान करती हैं—“देख रहा हूँ सपना क्या है?सपना है तो अपना क्या है?”मेरा पैतृक ग्राम टैरिया विशुद्ध ग्रामीण परिवेश में स्थित है, जो सलेमपुर से मात्र 3 किमी तथा प्रसिद्ध परशुराम धाम, सोहनाग से लगभग 2 किमी की दूरी पर स्थित एक ऐतिहासिक-धार्मिक क्षेत्र है।मेरे नाना पंडित रामचन्द्र शर्मा प्रख्यात स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे तथा पितामह पंडित श्री सीताराम तिवारी भारतीय रेल में कार्यरत रहे—वे अत्यंत दयालु और सरल स्वभाव के व्यक्ति थे।शिक्षा की शुरुआत सोहनाग के प्रसिद्ध प्राइमरी स्कूल से पाँचवीं तक तथा जूनियर हाई स्कूल सोहनाग से आठवीं तक हुई। इसके पश्चात गौतम इंटर कॉलेज, पिपरा रामधर से हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। इंटरमीडिएट में जनपद में प्रथम स्थान प्राप्त करने का सौभाग्य मिला। आगे गोरखपुर विश्वविद्यालय में बी.ए. में प्रवेश लिया और विश्वविद्यालय स्तर पर भी प्रथम स्थान प्राप्त किया। वर्ष 1978 में अंग्रेज़ी, संस्कृत एवं भूगोल विषयों से बी.ए. प्रथम श्रेणी तथा 1980 में एम.ए. (भूगोल) उत्तीर्ण किया।मदन मोहन मालवीय डिग्री कॉलेज, भाटपार रानी में लेक्चररशिप न मिल पाने पर गाँव छोड़ने का निर्णय लिया और पुणे, महाराष्ट्र को अपनी कर्मभूमि बनाया। कॉर्पोरेट क्षेत्र में 25 वर्षों तक कार्य करते हुए ग्रुप जनरल मैनेजर के पद तक पहुँचा। इस अवधि में एक मैनेजमेंट इंस्टिट्यूट की स्थापना फाउंडर ट्रस्टी के रूप में की।इसके पश्चात इंदिरा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट्स में डिप्टी डायरेक्टर (एडमिनिस्ट्रेशन एवं HR) के रूप में साढ़े आठ वर्षों तक सेवा दी, जहाँ केजी से पीजी तक—मैनेजमेंट, इंजीनियरिंग, फार्मेसी आदि की शिक्षा प्रदान की जाती है।वर्तमान में सेवानिवृत्त जीवन बड़े आनंद, संतोष और आत्मचिंतन के साथ व्यतीत हो रहा है—जहाँ अनुभव स्मृति बनते हैं और स्मृतियाँ साधना।

रामेश्वर नाथ तिवारी अपने बारे में मेरा जन्म    तेरह जनवरी  उन्नीस सौ उनसठ को   ग्राम  टैरिया  , पत्रालय - सोहनाग...