30 जनवरी, 2012
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पिता जी की डायरी से...
बिन ढूढे मिले नहीं , अपना ही पहचान . क्या ढुढत हो गैर को,बसत जहाँ अज्ञान . बसत जहाँ अज्ञान, राम भी पास में आये, मनुष्य जीवन धन्य,...
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"ऊं कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने प्रणत: क्लेश नाशाय, गोविन्दाय नमो-नम:"। देवराहा बाबा के भक्तों में कई बड़े लो...
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Shree Sadguru Shankar Maharaj’ श्री सद्गुरु शंकर महाराज ’ समाधि ...
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