01 मई, 2010

धनि मेहमान



धनि मेहमान रौवा धनि मेहमानी ,हुलसे ला देखि देखि सकल परानी .
स्वाति के बूंद चाहे चातक पियासा, नैना गरीब के लगी रहे आशा .
फूले ना समाये पाई सैलानी , धनि मेहमान रौवा धनि मेहमानी .
राउरे दरश से कलि खिल गईली , कोयल के कूक मधु रतिया सुहैली .
मोरवा के थिरकन ,धन बा सुहानी. धनि मेहमान रौवा धनि मेहमानी.
टूटही मॅडयिया बा खात बा पुरानि ,कुरुयी में लाटा बा गदूअवा में पानी.
हम सब अपना के बॅड भागी जानी , धनि मेहमान रौवा धनि मेहमानी.
शबरी के बेर बा सुदामा के चाऊर , बिदूर के साग बाते प्यार बाते राउर .
हमारे निवास आईली, छोड़ी राजधानी , धनि मेहमान रौवा धनि मेहमानी. 
अवधेश कुमार तिवारी

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