11 नवंबर, 2025

🌼 नीर-छीर विवेक : जीवन में सार और असार का ज्ञान 🌼जीवन का सागर अनगिनत लहरों से भरा है—कभी आनंद की, कभी भ्रम की। हर दिन हमें अनेक विचार, परिस्थितियाँ और लोग मिलते हैं। इनमें से कौन सा हमारे लिए शुभ है, कौन हानिकारक—यह समझ पाना ही “नीर-छीर विवेक” है।‘नीर’ अर्थात् जल और ‘छीर’ अर्थात् दूध—दोनों का मिश्रण देखने में समान लगता है, परंतु हंस उसमें से केवल दूध ग्रहण कर लेता है, पानी को छोड़ देता है। यही विवेक मनुष्य को चाहिए—जीवन के हर अनुभव में से सार को ग्रहण करना और निरर्थक को त्याग देना।आज की भागदौड़ में लोग जानकारी तो बहुत जुटा लेते हैं, परंतु विवेक कम हो गया है। ज्ञान तब ही फलदायी होता है जब उसमें नीर-छीर विवेक का प्रकाश हो। यदि यह गुण विकसित कर लिया जाए, तो व्यक्ति न केवल भ्रम से बचता है, बल्कि आत्मिक शांति और सफलता भी प्राप्त करता है।विवेक वही जो—अपमान में भी धैर्य रखे।असत्य में सत्य की खोज करे।परिस्थितियों में ईश्वर का संकेत देखे।यही नीर-छीर विवेक मनुष्य को साधारण से असाधारण बनाता है।🌺 निष्कर्ष:जिसने विवेक पा लिया, उसने जीवन का सार समझ लिया।और जो जीवन का सार समझ ले, वह स्वयं प्रकाश बन जाता है

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Bhang ( भांग)

Bhang  ( Hindi :  भांग ) Bhang ( Hindi : भांग ) is a preparation from the leaves and flowers (buds) of the female cannab...